एक दिन मन्गलवार को क्लास में मुझे बहुत गुस्सा लगा । तो मैं ने एक बातचीत लि्खा। आजकल क्लास में मुझे खुशी लगती है। मुझे क्लास में यह बातचीत नहीं बोलने चाहिये मगर मैं ने बहुत वक्त इस भषण पर लिखा। कभी कभी मैं हँसते-हँसते झेलती हूं लेकिन अब नहीं । मैं ने कुछ बद सलूक देखे। जब किस तालिब इल्म ने हिन्दी गलतियां की तब लड़के ने मुंह बिगाड़ा गया। अक्सर क्लास में मैं हिन्दी में बोलती डरती हूं क्योंकि मैं बहुत गलतियां करती हूं। हां तो मैं गलतियों करूंगी लेकिन मुझे किस आदमी मेरे कटे पर नमक छिड़कने नहीं चाहती हूं। अक्सर विजय जी हमसे सवाल पूछकर अच्छे हिन्दी बोलनेवाले मुंह से बात न करते । यह सलूक से मैं कम हिन्दी सीखती और अब हमें क्लास को ठीक करने चाहिये । अगर एक छात्र बोलता घर जैसे गर तब तुम उसे सही उच्चारण कहो ( शायद क्लास के बाद) । वह मेरा गोरा और मेरा घोड़ा एक बड़ा फ़र्क है। अगर तुम लोग मद्द देंगे तब शायद मैं कम गलतियां करूंगी और किन लोगों को न खिज हो जाएगा।
Monday, October 27, 2008
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