Monday, November 24, 2008

मेरा खानदान में पहले हर पुरुष बिस साल का है जब उन की पहली शादी हुई। बचपन में मुझे लगता था कि जब मेरी उम्र बीस साल है तब मेरी शादी हो चुकी। लेकिन अब मैं तेईस साल का हूं और मैं बीवी नहीं बनी। मुझे परेशान नहीं लगता हूं। मैं अपने होनेवाले पति से मिल गाई। वह मुम्बाई से है मैं पश्चिमी मिशिगन से हूँ। उस का खानदान हिन्दू लोग हैं और मेरा खानदान इसाई लोग हैं । मेरी शादी तीन-चार सल को होगी। शादी एक महंगी चीज़ है। तो हमें बहुत-से पैसे बचाना है और हमारा तालीम ख़त्म हो जाएंगे। यह मेरा परिवार का नया अधिकार है। मेरी शादी दो अलग जगह में होगा। भारत में हिन्दू रस्म होगी और दुसरी इसाई की रस्म अमरीका में होगी। मुझे पता नहीं कि क्या मुझे दोनों रस्म प्रबन्ध करना है। मेरी नानी के ख्याल में मुझे सिर्फ़ इसाई की शादी करने चाहिये। मेरे ख्याल में मुझे दोनों रस्म चाहिये तो दो खानदान ख़ुशी होने है। पहले अमरीका में बह इसाई रस्म हो तो मेरी मां की खानदान शान्ति हो जाएगा। मुझे आशा है कि सब ठीक हो जाएगा। मैं समझती हूं कि यह नाजुक स्थिति है। मैं इस स्थिति को बहुत ध्यान दूंगी।

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