शाम को मैं काम कर जाती हूं। दो बजे को मैं पुस्तकालय या अस्पताल से घर जाती हूं। मैं सूर्यास्त नहीं देखती हूं क्योंकि शाम को मुझे काम करना चाहती हूं। मुझे सूर्यास्त देखना पसन्द है चूँकि मुझे सूर्यास्त से सूर्योदय बहुत पसन्द है। देर से मैं सो जाती हूं। छ: बजे को मैं पलंग से उठती हूं। गर्मी को सूर्योदय के बाद जागती हूं। सरदी को सवेरे सवेरे पहले आकाश अधेरा होता है। मैं कुछ न्हीं देख सक्ती हूं । तब सूरज क्षितिज के उपर उठना शुरु होता है और आसमान स्लेटी और नरंगी होता है। क्षितिज की ओर जल्दी जल्दी आसमान गुलाबी सतर लाल और बैगनी होता है। अंग्रेजी में एक मुहावरा है सूर्योदय के बारे में है। मेरी नानी ने मुझसे कही, “ अगर सुबह लाल आस्मान होता तो जहाजी मल्लाह ध्यान दे । अगर सूर्यास्त को लाल आसमान होता है तो सैलोर्ज़ दीलाइट। कोई लोगों को आकाश के रंग निशान लगता है । शायद ख़राब आब-हवा होगा लाल होगा यदि सुबह आकश होता है । मेरे एल्दर्ज़ वह मुहारा विश्वास करते है तो आसमान का रंग के करण कुछ त्योहार काट हो गई।
इस दुनिया में कम जगह कुष्ट रोगियां का संभाल देखते हैं। शान्तिवन में एक कुष्ट रोगी का शरण स्थान है। वह गांव महाराष्ट्र में है और पनवेल के नज़दीक है। शान्तिवन में सिर्फ़ कुष्ट रोगियां अपने परिवार और मेहमान रहते हैं । शान्तिवन का ज़मीन ज़्हादा तर है तो गांवाले चावल बढ़ते हैं। सुबह एक दिन मैं ने किसानों को खेत में देखा। उन ने बहुत ज्ल्दी काम किया। मैं ने एक गांवाली के साथ चावल के खेत घूमके उस ने मुझे चावल के पौधा लगाना सीखा । मैं ने पौधा लगाने कोशिश किया पर मैं धीरे धीरे काम किया । उस पल में मैं निष्फल थी। अक्सर मैं कीचड़ में पड़ी और वह गांववाली हँसते हँसते थी । मैं भी हँसने हुई थी । लेकिन मुझे पराजित करने लगा तो मैं ने घर जाकर कपड़े बदला । उस दिन को मैं अच्छी किसान नहीं हुई थई । मुझे घर के पौधों को संभाल देख्नने बहुत पसंद है। तो मैं सिर्फ़ रसयन विग्यान बनूंगी।
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