Thursday, November 20, 2008

काम

पिछ्ले साल मैं मुंबई गई । मैं ने एक कार्यक्रम में मानसून को काम किया। उस कार्यक्रम मरीज़ों की सेहत के बारे में पढ़ती थी। मैं यह रोग ऐद्ज़, मलेरिया डेंगू बुखार leptospiriasis तपेदिक कुष्ठ रोग पढ़ी। आदि मैं कुष्ठ रोग की इतिहास लक्षण और धब्बा पढ़ी। मैं Acworth कुष्ठ रोग के अस्पताल में wadalla के नज़्दीक या डाक्टर म्हात्री की क्लिनिक में काम करती थी। फ़िर मैं ट्रेन गाड़ी से पनवेल पहुंचकर शान्तिवन एक गांव। शान्तिवन कुष्ट बीमारी की घर है। कभी कभी आदमी को कुष्ट रोग हुआ तब परिवार ने उस का परित्याग किया। तो वह बीमारी शान्तिवन आ जाते हैं। शान्तिवन में सब बीमारियां अच्छा होते हैं लेकिन कुछ आदमी घर नहीं वापस जा सकते हैं। जीवन के लिये वे ख़ूबसूरत क़ालीनें झोले और कंबल बनाते हैं। पहले वह रस्से बनाते हैं। फ़िर वह रस्से को नीला लाल संतरा पीला गुलाबी हल्का नीला और हरी लगाते हैं। उन के पास बाड़े करघे के पास हैं। हर लम्बा करघा 20 मीटर है। आहिस्ता आहिस्ता वह चीज़ें बनाते हैं। मुझे उन के चीज़ें बहुत पसन्द है। मैं ने शान्तिवन में क़ालीन बनाने के बारे पढ़ी और कुछ लोगों की ज़िन्दगी सुनी।

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