मेरे पास सात पौधे हैं। दो पौधे बहुत बड़े हैं और उनके नाम माँनी प्लेंट है। वह पौधे की लता लगभग आठ फ़ीट हैं । छत के कोणों लम्बे नल हैं तो मैंने लतों को नल के बारे में लपेटा। उन पौधे के पास बहुत पत्तियाँ हैं। उन के पत्तियाँ हरी और पीली हैं। एक पत्ती का शकल दिल जैसा है । वह पौधे जल्दी बड़े हो जाते हैं । परन्तु वह मेरा पसन्दीदा पौधा है ।
मेरे दुसरे पौधे एक अँग्रेज़ी प्रकार की लता तरह का पौधा और दो ताड़ के पौधे हैं। दो पौधा डेस्क पर रहते हैं । मेरे दुसरे पौधे खिड़की में हैं । मेरा पसन्दीदा पौधा एक ताड़ का पौधा है । उस के पत्तियाँ छोटे हैं । आज एक पत्ती मार हो रही है। दो ह्फ़्ते पहले मेरे सब से अच्छा पौधा फूल शुरू हो रहा था। वह फ़ूल गेहरा गुलाबी है ।
मैं हर हफ़्ता पौधों को पानी देती हूँ। मैं दो या तीन लिटर पौधों को देती हूं । मैं रम बाटल से पानी देती हूँ। जब एक पौधे को मिट्टी चाहिये तब मैं आधिक मिट्टी उस के घमले में रखती हूँ।
मेरे पास एक गुलाब थी लेकिन एक बार मैं ने एक बार इतने ज़्यादा पानी गुलाब को दी तो वह मुझसे मर गई। अब मैं क्भी नहीं गुलाब का पौधा ख़रीदूंगी।
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6 comments:
बहुत अच्छा लिखा है. स्वागत है आपका
बहुत खूब!आपके तख्लीकी-सर्जनात्मक जज्बे को सलाम.
आप अच्छा काम कर rahi हैं.
फ़ुर्सत मिले तो हमारे भी दिन-रात देख लें...लिंक है:
http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/
http://hamzabaan.blogspot.com/
आपने मन की बात लिखी है। लिखते रहिए। शुभकामनाएं।
क्या लिखा कुछ समझ नहीं आई, फिर भी स्वागत की रस्म हमनें निभाई
स्वागत है आपका.....
नए चिट्ठे का स्वागत है. निरंतरता बनाए रखें.खूब लिखें,अच्छा लिखें.
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है निरंतरता की चाहत है बहुत सटीक लिखते हैं समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी दस्तक दें
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