Monday, September 8, 2008

मेरे बचपन में मैं सोचती थी कि मैं एक अनुवादक united nations के लिये बनूँगी। वह सिर्फ़ ख़्वाब था क्योंकि मेरे परिवार ने ख्याल नपसन्द किया था। शायद एक दिन मैं अपनी नौकरी के लिये हिंदी बोलूँगी । तो हर सेमेस्टर मैं कोई भाषा सीखती हूं । अभी मैं हिन्दी और उर्दू सीखती हूं और विज्ञान पढ़ती हूँ। मुझे यह हिँदी की क्लास मुश्किल है। शायद आप सोचते होगे, “ क्यों उसे इस क्लास से कठिनाई है?” मुझे बहुत ख्याल विषय के बारे में हैं। पहले मैं हिन्दूस्तानी नहीं हूं और क्लास में बहुत अच्छे हिन्दी बोलनेवाले हैं। दुसरा मैं पांच क्लास ले रही हूं । मुझे दो नौकरी है। मैं दोस्त को भी मद्द देती हूं। वह वैज्ञानिक है । क्भी क्भी उसे बहुत काम है तो मैं लैब में आकर मद्द देती हूं। तीसरा मुझे थोड़े शब्द आते है। हर रात मैं शब्द याद करने कोशिश करती हूं। मुझे नहीं मालूम है यादि मैं यह क्लास ले सकूंगी। मैं हिन्दी प्यार करती हूं लेकिन मेरी नौकरी के लिये रसायन शास्त्र पढ़ने बहुत बहुत ज़रूरी है। अभी मेरा बड़ा क्वाइश है कि मैं बहुत अच्छी विज्ञानवाली बनूँगी। अब तक मैं दो घंटे रोज़ हिन्दी सीखी हूं। यह इतने ज़्यादा तो मैं कम समय हिन्दी सीखूंगी हूं। मैं अच्छे काम में लाने कोशिश करूंगी पर क्भी क्भी मैं कुछ काम डेर ख़त्म कर हूंगी।

No comments: