Saturday, September 20, 2008

एक सपना
कभी कभी रात को मुझे सपने आते है। कुछ ख़्वाब बहुत ख़राब है तो मेरा नींद टूट गया। इन रात को मैं डर भी लगती हूं। पिछले सर्दी मुझे एक सपना आया । अचल मैं सपना की याद करती हूं।

रात का मौसम सुन्दर है । बर्फ़ पड़ रही है मैं अपनी कमरे की ख़िड़की से आसमान देख रही हूं। मेरे लिये सब दुनिया चुप हो गई और मैं कुछ नहीं सुन सकी हूं। अचानक मैं चीख़ किसी औरत से सुन रही हूं। मैं समझ है कि यह आवाज़ मेरी छोटी बहन से है । मैं घर छोड़ी और अवाज़ की तरफ़ जल्दी से चलती है । मुझे ठंड नहीं लग रही हूं। अवाज़ कानन में है इसलिये मुझे धीरे धीरे जाने है । वह रात अंधेरी है और कुछ नहीं प्रकाश चान्द से है। तभी सब ख़ामोश हो गई । मैं ने अपनी बहन देख नहीं सकी तो कुछ समय पर मैं ने बहन को भलाई । मैं बर्फ़ पर बैठी । फ़िर सब दुनिया चुप हो गई मैं अपनी हाथों मैं तर लग रही हूं । मुझे मिट्टी गर्म लगी । एक पेड़ के नज़दीक मेरी बहन की लाश है । मैं दोबारा उस का नाम चीखी तब मुझे बाहार आदमी ने हाथों से मेरी कंधे को पकड़े।

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